पास्कल की उपलब्धियों का सच : धर्म के पीछे का राज : EP7
सत्रहवीं शताब्दी में फ्रांस में पास्कल नाम के एक महान व्यक्तित्व का जन्म हुआ। वे बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने गणितज्ञ, भौतिकविद, आविष्कारक , दार्शनिक , लेखक एवं अन्य भूमिका में इस भौतिक संसार में काम किया और कई महत्वपूर्ण योगदान इस भौतिक संसार को दिया।<!--more--वे मात्र 39 वर्ष तक जीवित रहे मगर इतने कम उम्र में उन्होंने दुनियाँ को इतना कुछ दिया कि आज एक आदर्श पुरुष के रूप में उनकी गिनती होती है।
पास्कल द्वारा प्रतिपादित संभावना सिद्धांत (Probability Theory) और पास्कल त्रिभुज (Pascal's Triangle) आज भी दुनियाँ के गणितज्ञों को मदद कर रही है। पास्कल द्वारा बनायी गयी पास्कल कैलकुलेटर, मैकेनिकल कैलकुलेटर और जोड़ मशीन (Adding Machine) कम्प्यूटर विज्ञान के आधार स्तम्भ (Foundations) रहे है।
इतनी उपलब्धियों के बाबजूद पास्कल में विनम्रता थी। उनके तमाम अविष्कारों के बारे में जब उनसे एक बार पूछा गया तो उन्होंने कहा कि-ये अविष्कार मेरे नहीं है। इस ब्रह्माण्ड में हमसे कोई बड़ी शक्ति है जिन्होंने इन सारी चीजों को करके रखा है। हम तो सिर्फ उन चीजों को समझ कर इस दुनियाँ को समझने लायक बना रहे है।
कुछ वैज्ञानिकों के द्वारा प्रकृति के ऊपर अपना नियंत्रण स्थापित करने के दावे को लेकर एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा की-" जिन्होंने विज्ञान को कम समझा है वे ही ऐसा दावा कर सकते है।" उन्होंने कहा -" जब हम विज्ञान की गहराइयों में जाते है तो हमें यह महसूस होता है कि हम तो मोटी-मोटी चीजों के सहारे कोई अविष्कार कर रहे है। सुक्ष्म चीजों की अवसंरचना जिसने बनायी वह असली अविष्कारक है।वह कोई बड़ी शक्ति है , जिनकी तुलना में हम सभी कुछ भी नहीं है।"
हमारी वर्तमान खोज और अविष्कार का आधार परमाणु (atom) है। विज्ञान इतना प्रगति कर गया है कि परमाणु के अंदर विद्यमान इलेक्ट्रॉन , प्रोटोन, न्यूट्रॉन, न्यूक्लियस , इत्यादि का पता लगा लिया है। अभी हाल में 'गॉड पार्टिकल' (Higgs boson )भी हमने खोजा है।
नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) के सिद्धांतों पर हमारी परमाणु भट्टियां चल रही है और हम बिजली बना रहे है। हमने परमाणु बम जैसे सुरक्षा अस्त्र भी परमाणु से बनाया है। नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) के आधार पर सूर्य में होने वाले हाइड्रोजन के हीलियम में परिवर्तन का भी अविष्कार हमने किया है।
लेकिन परमाणु को तो हमने नहीं बनाया। बनाने की तो छोड़िये , नाभिकीय विखंडन के दौरान होने वाली श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction ) को नियंत्रित करने के लिए भी हमें कैथोड ट्यूब लगाने पड़ते है। भारी जल, मंदक इत्यादि का सहारा लेना पड़ता है। तो फिर सवाल है परमाणु में जब इतनी शक्ति है तो परमाणु को बनाने वाली शक्ति किस स्तर की होगी? वे कैसे वैज्ञानिक होंगे जिन्होंने इसे बनाया ?
भारत के बहुचर्चित उपनिषद भगवद्गीता के दसवें अध्याय में इस शक्ति का वर्णन आता है। जो सर्व शक्तिमान है। यह शक्ति छः ऐश्वर्यों से परिपूर्ण है। सम्पूर्ण शक्ति, सम्पूर्ण यश, सम्पूर्ण धन, सम्पूर्ण ज्ञान, सम्पूर्ण सौंदर्य तथा सम्पूर्ण त्याग से विभूषित वह शक्ति परम भगवान है।
'धर्म के पीछे के राज' के अगले अंक में हम परम भगवान के बारे में विस्तार से बात करेंगे। जानते रहिये-'धर्म के पीछे का राज'।
©#राहुल देवाशीष
