
गरीबी का पीछा
धूल-धूसरित, सड़क पर, लड़खड़ाते, डगमगाते पावों को, बड़ी दूर तक, चलते देखा है। दो जुगत की, ...
धूल-धूसरित, सड़क पर, लड़खड़ाते, डगमगाते पावों को, बड़ी दूर तक, चलते देखा है।
दो जुगत की, रोटी के लिये, गलियों में, चीखते, चिल्लाते देखा है।
मजबूर कहो, लालची कहो,या सनकी कहो, अमीरों की अमीरी का, पीछा करते हुये, कई गरीब को , गरीब ही मरते देखा है।
© राहुल देवाशीष