
हिंदी हूँ मैं
हिंदी हूँ मैं भारत की अभिव्यक्ति हूँ, कविता, कहानी,संस्कृति में हूँ ।। कितना भी मुझसे दूर ह...
हिंदी हूँ मैं
भारत की अभिव्यक्ति हूँ, कविता, कहानी,संस्कृति में हूँ ।।
कितना भी मुझसे दूर हो, कभी नहीं डिगती हूँ।।
बसी हुई हूँ, सबके रोम रोम में, हूँ, सबके संस्कारों में।।
भाषा हूँ, मर्यादा हूँ, मधुर भाव के साथ हूँ।।
है, संस्कृत मेरी जननी, उस जैसी हीं समृद्ध बनी।।
हिंदुस्तान के रोम-रोम में, पर, जख्मों से भरी पड़ी।।
पराया कर मुझको तुम, अंग्रेजी की लगाते हो लड़ी।।
रखो तुम बस इतना ध्यान, ना हो मेरा अपमान।।
चाहे जिस प्रकार दो, सबको हिंदी का ज्ञान दो।।
हिंदी से हीं हिंदुस्तान है, हिंदी देश की शान है।।
हिंदी दिवस की शुभकामनाएं
©अमृता