Gopal Kumar
Gopal KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·3 min read·1·

धर्मव्यवस्था में शान्ति क्षेत्र का योगदान !

आजकल जिसे दिखिए वो धर्म और अध्यात्म की बड़ी बड़ी बाते करते रहते है और जो व्यक्ति अशांत नहीं भी है उसे शांति प्राप्त करने तथा खुश रहने का रास्ता और दुकान का पता बता बता कर अशांत कर देते है ! ("सबसे पहले एक बात बता दू कि मैं यहाँ "धर्म " शब्द का प्रयोग उस अर्थो में किया हूँ जो सामान्यतः समाज में देखा जाता है ना कि, वो अर्थ जो सिर्फ अच्छे अच्छे ग्रंथो में ही आराम करने के लिए ही गढ़ा गया है ") जिस तरह से अर्थव्यवस्था सबसे पहले कृषि क्षेत्र से औद्यौगिक क्षेत्र की तरफ बढ़ी और उसके बाद आयी सेवा क्षेत्र(सर्विस सेक्टर) का युग जो अर्थव्यवस्था की उन्नति के लिए सबसे अधिक संभावित क्षेत्र माना जाता है ! इसी प्रकार धर्म के व्यापार में तीन महत्वपूर्ण बदलाव देखे जा सकते है!

सबसे पहले धर्म का व्यापार स्वर्ग में सीट रिज़र्व कराने पर केंद्रित था ! उसके बाद धर्म थोड़ा आधुनिक हो कर अपने दूसरे चरण में प्रवेश किया जिसमे यह व्यापार मोक्ष दिलाने पर केंद्रित हो गया हो गया ,यानि अब स्वर्ग नर्क का चक्कर छोरो और सीधे मोक्ष के लिए अप्लाई करो और तुरंत पाओ , उसके बाद धर्म अपने तीसरे चरण में अत्याधुनिक कांसेप्ट को लांच किया किया, वो है शांति प्राप्त करने का कांसेप्ट जो पुरे धर्म व्यवस्था को ही एक नया रूप दे दिया जो अब अपने चपेट में पुरे मानव प्राणी को लेने का कुव्वत रखता है और बाजार के हिसाब से ये सबसे ज्यादा मांग की जाने वाली धार्मिक उत्पाद है, जिसके लिए उपभोक्ता कोई भी कीमत चुकाने को तत्पर है ! और बाज़ार विश्लेषक बताते है कि ये उत्पाद उस धार्मिक मंदी को भगाने में कारगर सिद्ध होगी जो मंदी पश्चिम के वैज्ञानिक खोजो के बाद आई थी इस बाज़ार में !

सबसे अनोखी बात इस क्रांतिकारी बदलाव से ये हुई की शांति प्राप्त करने का कांसेप्ट ने धर्म का वैश्वीकरण ,निजीकरण तथा उदारीकरण का मार्ग प्रशस्त किया जिसका फ़ायदा खासकर भारतीय धर्म उद्यमियों को मिला क्योकि इस कांसेप्ट से पुरे विश्व में एक तैयार उपभोक्ता वर्ग आसानी से मिल गया जो जम के इस उत्पाद का उपभोग कर रहे हैं ! इस क्षेत्र में बहुत सारे धार्मिक औद्यौगिक घराने पूरी निष्ठा से अपने उत्पाद को लोकप्रिय बनाने के लिए अपने सत्यनिष्ठ सेल्समैन के शांतिप्रिय दिमाग को अच्छे से पैकेजिंग करके इसे बाजार मैं मानसिक मिसाइल के रूप में छोर देते है जो लोगो को अशांत कर कर के शांत करने का रास्ता और दुकान का पता बताते हैं !

सबसे बड़ी रोचक बात इस क्षेत्र की ये है कि इसमें पैसा माँगा नहीं जाता (अगर कुछ कंपनी को छोर दे तो ) बल्कि उपभोक्ता खुद व खुद उत्पाद लेने के प्रक्रिया के दौरान ही पैसा देने की सहज स्थिति में आ जाते है ! फिर भी अगर जो उपभोक्ता पूरी तरह से कंगाल होते है उससे कंपनी अपनी सेल्समैन के रूप में सेवा ले ही लेती है क्योकि इस दुनिया में मुफ़्त कुछ भी नहीं मिलता !

जिस तरह से सेवा क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद पूरी तरह अर्थव्यवस्था कृषि और उद्योग को नहीं नकार सकता उसी तरह धर्म के क्षेत्र में भी शांति प्राप्त करने का कांसेप्ट अपने पहले के उत्पाद यानी स्वर्ग आरक्षण तथा मोक्ष टिकट को पूरी तरह नहीं बंद किया है !

और जिन अशांत आत्मा को इन उत्पादों की जरूरत है वो थोड़ा दिन रुक जाए और दिवाली के ऑफर के साथ ही खरीदारी करे और लुफ्त उठाये तब तक अच्छे ब्रांड के बारे में आप पता कर सकते हैं !