सूर्य की आभा
सूर्य की आभा का दर्शन, सुबह सुबह करता हूं। कर देती ऊर्जावान एवम् जीवंत, इनकी लालिमा। प्रकृति की अंगड़ाई अनोखी है, सदा परिवर्तनशील।
खिल पड़ते है, सभी जीव व पेड़ पौधे, गतिमान भी। निर्जीव व सजीव सभी के, ऊर्जा स्रोत तो सूरज है। कर ले पान इनकी आभा का, दीप्त हो हमसभी।
सूर्य ही ऊर्जा के मूल कारण, करे इनकी टकटकी। करे पान इनकी किरणों का, सौर्य ऊर्जा को आत्मसात करें। सूर्य नमस्कार करे इनका, आसनों के 24 क्रम द्वारा।
सूर्य की आभा, ऊर्जा की स्रोत, स्वास्थ्य देने वाली है। पूजा करे सूर्य देवता की, नमन करे इस प्राकृति की। यही सभी के पालनकर्ता है, सभी के रखवाले है।
समेत ले सूर्य की आभा, अपने चक्रों में। पूरे दिन ऊर्जावान रहे, जीवन को संचालित करे। सूर्य की ऊर्जा का है महत्व, इसके बिना जीवन बेमानी है।
बने बिना किसी पूर्व ग्रहों से, नित दिन सूर्य का दर्शन करे। ले सूर्य की आभा, नए ऊर्जा का आगाज करे। सूर्य की आभा का दर्शन, सुबह सुबह करता हूं।
#sunenergy
©#मिथिलेश कुमार
