
बलशाली और निर्बल
ओ बलशाली नहीं है तू निर्बल है बस थोड़ा सा खेल मनचले तेरे मन का गीत गा तू अपनी आत्मा का साथ पा ...
ओ बलशाली नहीं है तू निर्बल है बस थोड़ा सा खेल मनचले तेरे मन का गीत गा तू अपनी आत्मा का साथ पा तू अपने आप का
क्यों फंसा है भ्रम में पतन के जाग पक्षियों की तरह उठ चल फकीरों की तरह क्या संकोच फूल पर कांटों का पड़ा जाग इस सत्य में परिवर्तन के
छोड़ अंधेरे ठहरने के नहीं ढूंढ मंजिल को मार्ग पास है तेरे तेरा मेरा सबका समागम है इसी भ्रम के परे सूर्य रश्मियों के आवाहन पर प्रकृति साथ है तेरे
© सिद्धार्थ राणा