
मुक्ति
इस बार अच्छी फसल होगी, बड़की की शादी तक एक लाख मिल जायेंगें फसल बेच कर साहूकार को कर्ज चुका दूँगा...
इस बार अच्छी फसल होगी, बड़की की शादी तक एक लाख मिल जायेंगें फसल बेच कर साहूकार को कर्ज चुका दूँगा, मंगलू अपनी पत्नी को समझा रहा था जो बेटी की शादी के बिल्कुल भी पक्ष में नही थी।
वो बार-बार कह रही थी कि एक बार फसल बिक जाए तब शादी की तारीख तय करेंगे पर मंगलू तैयार न था उसे छुटकी की भी शादी करनी थी।दो बेटियों की शादी, घर खर्च सिर्फ खेती के पैसे से करना बहुत मुश्किल था। शादी की तैयारी होने लगी और कर्ज के पैसे से बड़की से मुक्ति पा ली मंगलू ने।
दिन बीतते गये, नेपाल से आई बाढ़ ने सब कुछ खत्म कर दिया, परिवार के पास न तो फसल बची और न ही छत, दाने-दाने को वो मोहताज हो गये इस पर महाजन का सूद, खाने- रहने की चिंता ने मंगलू को मानसिक रूप से तोड़ दिया।
परिवार का दुःख उससे देखा नही जा रहा था, पत्नी की बात याद आ रही थी कि कुछ दिन रुक जाते है पैसों के इंतजाम के बाद शादी करते हैं पर उसे तो मुक्ति पानी थी। यही सोचते-सोचते बाढ़ के पानी में उसके कदम बढ़ गये और एक और अन्नदाता कर्ज से मुक्त हो गया।
©#अमृता