Amrita Singh

Amrita Singh

📝 BlogLiteraturePoetry
2 May 2021·1 min read

बचेगें जो वो इतिहास लिखेंगें

बचेगें जो वो हीं तो कल इतिहास लिखेंगें, कोरोना काल की सारी बात लिखेंगें, पर इंसानियत की मौत का...

बचेगें जो वो हीं तो कल इतिहास लिखेंगें, कोरोना काल की सारी बात लिखेंगें, पर इंसानियत की मौत का अध्याय शायद हीं जोड़ेंगें।

बचेगें जो वो हीं तो कल इतिहास लिखेंगें थम रहीं थी जब सबकी सांसें, वो गिन रहे थे लाशें,

बचेगें जो वो हीं तो कल इतिहास लिखेंगें हर कारोबार का हिसाब लिखेंगें, तराजू था कोरोना का, भेदभाव नहीं था,

बचेगें जो वो हीं तो कल इतिहास लिखेंगें उम्र का भी कोई हिसाब नहीं था, थमती साँसों के लिए कोई इंतजाम नहीं था,

बचेगें जो वो हीं तो कल इतिहास लिखेंगें संवेदना थी शोक था पर साथ नहीं था, रुआब था पुण्य था पर सांसे नहीं थी।

बचेगें जो वो हीं तो कल इतिहास लिखेंगें कोरोना काल की सारी बात लिखेंगें, पर इंसानियत की मौत का अध्याय शायद हीं जोड़ेंगें।

बचेगें जो वो हीं तो कल इतिहास लिखेंगें थम रहीं थी जब सबकी सांसें, सब नजर फेर रहे थे, अपने हो या पराये, हम क्यों वहाँ जायें।

बचेगें जो वो हीं तो कल इतिहास लिखेंगें अहसानों की नुमाइश थी, आस भी जिससे बन आयी थी।

बचेगें जो वो हीं तो कल इतिहास लिखेंगें गिद्ध थे सभी बस धन पर नजर थी, नज़रिये में कुछ तो कमी थी।

बचेगें जो वो हीं तो कल इतिहास लिखेंगें कोरोना काल की सारी बात लिखेंगें, पर इंसानियत की मौत का अध्याय शायद हीं जोड़ेंगें।

बचेगें जो वो हीं तो कल इतिहास लिखेंगें हर कारोबार का हिसाब लिखेंगें, तराजू था कोरोना का, भेदभाव नहीं था।

बचेगें जो वो हीं तो कल इतिहास लिखेंगें फिर भी देव थे कुछ लोग, अन्न, धन,मन भी बहे थे।

बचेगें जो वो हीं तो कल इतिहास लिखेंगें हवा मगर गंदी थी, कम लोग बचे थे।

बचेगें जो वो हीं तो कल इतिहास लिखेंगें

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© अमृता सिंह

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